जब भी क्रिकेट के इतिहास की बात होगी, एक नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में चमकता रहेगा, सचिन रमेश तेंदुलकर। सचिन सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारत की एक भावना हैं। सोलह साल की उम्र में पाकिस्तान के खूंखार गेंदबाज़ों के सामने अपना सफर शुरू करने वाला वह छोटा सा लड़का कब क्रिकेट का भगवान बन गया, इसका गवाह पूरी दुनिया रही है। उनकी बल्लेबाज़ी में जो ठहराव और शॉट में जो नज़ाकत थी, उसने दो दशकों से ज़्यादा समय तक करोड़ों प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध रखा।
क्रिकेट की दुनिया में लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर ने जब पहली बार मैदान पर कदम रखा, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वे मास्टर ब्लास्टर बनकर दुनिया के हर गेंदबाज़ के लिए एक दुःस्वप्न बन जाएंगे। उनकी तकनीक में जो मास्टरी थी और उनके शॉट में जो धमाका था, उसी ने उन्हें करोड़ों दिलों का राजा बनाया।
व्यक्तिगत विवरण
सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। वे एक शीर्ष क्रम के दाएं हाथ के बल्लेबाज़ रहे हैं, और उनके बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर थे, जिन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही उनकी प्रतिभा को पहचान लिया था।
करियर के आंकड़े, बल्लेबाज़ी
| फॉर्मेट | मैच | रन | औसत | शतक/अर्धशतक | उच्चतम स्कोर |
|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 200 | 15,921 | 53.78 | 51/68 | 248* |
| वनडे | 463 | 18,426 | 44.83 | 49/96 | 200* |
| टी20 | 1 | 10 | 10.00 | 0/0 | 10 |
करियर के आंकड़े, गेंदबाज़ी
| फॉर्मेट | मैच | विकेट | औसत | सर्वश्रेष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 200 | 46 | 54.17 | 3/10 |
| वनडे | 463 | 154 | 44.48 | 5/32 |
| टी20 | 1 | 1 | 12.00 | 1/12 |
पार्ट टाइम गेंदबाज़ होने के बावजूद सचिन ने वनडे क्रिकेट में एक बार पांच विकेट भी लिए थे, जो किसी भी शौकिया गेंदबाज़ के लिए असाधारण उपलब्धि मानी जाती है।
फील्डिंग के आंकड़े
टेस्ट क्रिकेट में सचिन के नाम 115 कैच दर्ज हैं, जबकि वनडे में यह आंकड़ा 140 कैच का है। यह दिखाता है कि सचिन सिर्फ बल्लेबाज़ी में ही नहीं, मैदान पर भी टीम के लिए उतने ही उपयोगी रहे।
कप्तानी के आंकड़े
टेस्ट क्रिकेट में सचिन ने 25 मैचों में कप्तानी की, जिसमें उन्हें 4 जीत और 9 हार मिली, बाकी 12 मैच ड्रॉ रहे। इस तरह उनका जीत प्रतिशत करीब 16 रहा। वनडे में उन्होंने 73 मैचों में कप्तानी संभाली, जिसमें 23 जीत और 43 हार मिली, और उनका जीत प्रतिशत करीब साढ़े 31 रहा। दिलचस्प बात यह है कि कप्तानी का दबाव सचिन की बल्लेबाज़ी पर हमेशा भारी पड़ा, यही वजह रही कि उन्होंने खुद कप्तानी की ज़िम्मेदारी से दूरी बनाकर सिर्फ बल्लेबाज़ी पर फोकस करना बेहतर समझा।
छक्कों का आंकड़ा
टेस्ट क्रिकेट में सचिन ने कुल 69 छक्के लगाए, वनडे में यह आंकड़ा 195 छक्कों का है, जबकि उन्होंने अपने इकलौते टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में कोई छक्का नहीं लगाया। वनडे में सचिन उन गिने-चुने खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने दोहरा शतक लगाया है, जो उनके छक्कों और चौकों दोनों की गिनती में झलकता है।
सचिन क्यों हैं एक लीजेंड
सौ अंतरराष्ट्रीय शतक
यह क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा और अनोखा रिकॉर्ड है। सचिन दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक लगाया है, इसमें 51 टेस्ट शतक और 49 वनडे शतक शामिल हैं। उन्होंने अपना सौवां शतक 16 मार्च 2012 को बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर में बनाया था। उनके बाद दूसरे स्थान पर विराट कोहली हैं, लेकिन सौ शतकों तक पहुंचना आज भी किसी भी बल्लेबाज़ के लिए एक हिमालयी चुनौती है।
टेस्ट में सर्वाधिक रन
सचिन के नाम टेस्ट क्रिकेट में रनों का ऐसा पहाड़ है जिसे तोड़ना नामुमकिन सा लगता है, कुल 15,921 रन, 200 मैचों में, 53.78 के औसत से। उन्होंने 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली टेस्ट में ब्रायन लारा के 11,953 रन के रिकॉर्ड को तोड़कर यह मुकाम हासिल किया था। दिलचस्प बात यह है कि इस साल जो रूट ने सचिन के दो और बड़े टेस्ट रिकॉर्ड तोड़े हैं, सबसे ज़्यादा अर्धशतक और चौथी पारी में सबसे ज़्यादा रन, लेकिन कुल टेस्ट रन के मामले में सचिन अभी भी करीब 1,650 रन आगे हैं।
वनडे में सर्वाधिक रन
वनडे फॉर्मेट में सचिन ने उस दौर में बल्लेबाज़ी की जब 250 का स्कोर भी बड़ा माना जाता था। उनके नाम कुल 18,426 रन हैं, 463 मैचों में, 44.83 के औसत से। उनके और दूसरे नंबर के खिलाड़ी के बीच करीब 4,000 रनों का अंतर है। उन्होंने वनडे में ही पुरुष क्रिकेट का पहला दोहरा शतक 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाया था।
टेस्ट में सर्वाधिक शतक
सचिन ने दुनिया के हर कोने और हर बड़ी टीम के खिलाफ टेस्ट शतक जड़े हैं। उनके नाम कुल 51 टेस्ट शतक हैं, जिसमें सबसे ज़्यादा 11 शतक उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाए, जो उस दौर की सबसे घातक टीम मानी जाती थी। अपने 24 साल लंबे करियर में सचिन ने लगभग हर साल कोई न कोई टेस्ट शतक ज़रूर लगाया।
2011 विश्व कप की जीत
सचिन के लिए विश्व कप जीतना एक अधूरा सपना था, जो उनके छठे और आखिरी विश्व कप प्रयास में पूरा हुआ। 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत ने श्रीलंका को हराकर विश्व कप जीता। इस टूर्नामेंट में सचिन भारत के सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे, कुल 482 रन के साथ, और उन्होंने इंग्लैंड तथा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अहम शतक भी लगाए। जीत के बाद पूरी भारतीय टीम ने सचिन को कंधों पर उठाकर मैदान का चक्कर लगाया था। विराट कोहली ने उस पल पर एक मशहूर बात कही थी-
“सचिन ने इक्कीस साल तक देश का बोझ अपने कंधों पर ढोया, अब बारी हमारी थी कि हम उन्हें कंधों पर उठाएं।”
Virat Kohli
कुछ और बातें भी सचिन को बाकी सबसे अलग बनाती हैं। उनकी स्ट्रेट ड्राइव को क्रिकेट की दुनिया का सबसे खूबसूरत शॉट माना जाता है। चौबीस साल तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना और लगातार फिटनेस बनाए रखना अपने आप में उनकी महानता का सबूत है। नब्बे के दशक में जब पूरी भारतीय टीम लड़खड़ा जाती थी, तब सचिन अकेले दीवार बनकर खड़े रहते थे। और अपने पूरे करियर में उन्होंने कभी अंपायर के फैसले पर अभद्रता नहीं दिखाई, हमेशा इस खेल की गरिमा बनाए रखी।
करियर की सबसे यादगार पारियां
टेस्ट क्रिकेट में सचिन की तीन पारियां आज भी हर क्रिकेट फैन की ज़ुबान पर हैं। 2004 में सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई नाबाद 241 रन की पारी खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने पूरी पारी में एक भी कवर ड्राइव नहीं खेला था, जो उनके ज़बरदस्त मानसिक अनुशासन को दिखाता है। 1992 में पर्थ की सबसे तेज़ पिच पर सिर्फ अठारह साल की उम्र में खेली गई 114 रन की पारी को दुनिया आज तक नहीं भूली। और 1999 में चेन्नई में पाकिस्तान के खिलाफ पीठ दर्द के बावजूद खेली गई 136 रन की पारी लगभग भारत को जीत दिला ही चुकी थी।
वनडे क्रिकेट में भी कुछ पारियां किंवदंती बन चुकी हैं। 2010 में ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाए गए नाबाद 200 रन, पुरुष वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक थे। 1998 में शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई 143 रन की पारी को क्रिकेट इतिहास में डेज़र्ट स्टॉर्म के नाम से जाना जाता है, जिसने शेन वॉर्न और उनकी पूरी टीम को हिला कर रख दिया था। और 2003 विश्व कप में सेंचुरियन में पाकिस्तान के खिलाफ शोएब अख्तर की गेंद पर लगाया गया वह छक्का आज भी हर भारतीय के ज़हन में ताज़ा है।
बड़ी उपलब्धियां और सम्मान
सचिन 2011 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के विजेता रहे हैं। उन्हें भारत रत्न 2014 में, पद्म विभूषण 2008 में, राजीव गांधी खेल रत्न 1997-98 में, और अर्जुन पुरस्कार 1994 में मिल चुका है। वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतक लगाने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं, टेस्ट और वनडे मिलाकर सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं (कुल 34,357 रन), और सबसे ज़्यादा टेस्ट तथा वनडे मैच खेलने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है।
आईपीएल करियर
आईपीएल में सचिन ने कुल 2,334 रन बनाए, 78 मैचों में, और पूरे करियर में सिर्फ मुंबई इंडियंस के लिए ही खेले, 2008 से 2013 तक। उन्होंने मुंबई इंडियंस की कप्तानी भी की और 2010 में ऑरेंज कैप जीती। उनके नेतृत्व में मुंबई इंडियंस एक बेहद मज़बूत और संगठित टीम बनकर उभरी, जिसकी नींव आगे चलकर टीम की भविष्य की सफलताओं का आधार बनी।
निष्कर्ष
सचिन तेंदुलकर सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने दिखाया कि मेहनत, अनुशासन और विनम्रता से कोई भी दुनिया के शिखर तक पहुंच सकता है। भले ही आज वे मैदान पर नहीं हैं, लेकिन क्रिकेट की हर गली और हर रिकॉर्ड बुक में उनका नाम हमेशा गूंजता रहेगा।





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