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जो रूट ने तोड़ा सचिन तेंदुलकर का एक और रिकॉर्ड: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय

IPL Glory September 13, 2026
Joe Root celebrates breaking Sachin Tendulkar's record for most Test half-centuries in cricket history.

12 सितंबर 2026 का दिन इंग्लिश क्रिकेट के लिए यादगार बन गया। बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे टेस्ट में जो रूट ने नाबाद 62 रन बनाकर सिर्फ इंग्लैंड को 8 विकेट की जीत ही नहीं दिलाई, बल्कि भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर के एक ऐसे रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया, जो 13 साल से अजेय था। रूट अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज़्यादा अर्धशतक (fifty) जड़ने वाले बल्लेबाज़ बन गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह इस साल रूट का तेंदुलकर के नाम दर्ज किसी बड़े रिकॉर्ड को तोड़ने का दूसरा बड़ा मौका है – कुछ महीने पहले ही उन्होंने चौथी पारी में सबसे ज़्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। इस लेख में हम समझेंगे कि यह उपलब्धि वाकई कितनी बड़ी है, इसके पीछे के आंकड़े क्या कहते हैं, और क्या रूट सच में तेंदुलकर के 15,921 रन के “अछूते” रिकॉर्ड तक पहुंच सकते हैं।

एजबेस्टन में क्या हुआ?

पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज़ के तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड को चौथी पारी में जीत के लिए महज़ 130 रन का लक्ष्य मिला था। शुरुआत में इंग्लैंड ने जल्दी 2 विकेट गंवा दिए, लेकिन जॉर्डन कॉक्स के साथ मिलकर रूट ने तीसरे विकेट के लिए नाबाद 130 रन की साझेदारी करते हुए मैच को पहले ही सेशन में खत्म कर दिया। रूट ने 69 गेंदों पर नाबाद 62 रन बनाए, जिसमें 9 चौके शामिल थे। यही पारी उनका करियर का 69वां टेस्ट अर्धशतक बनी – जो सचिन तेंदुलकर के 68 अर्धशतकों के पुराने रिकॉर्ड से एक ज़्यादा है।

सबसे चौंकाने वाली बात आंकड़ों में छिपी है: तेंदुलकर को 68 अर्धशतक जड़ने में 329 पारियां लगी थीं, जबकि रूट ने यह आंकड़ा सिर्फ 309 पारियों में ही छू लिया। यानी रूट न सिर्फ संख्या में आगे निकले, बल्कि उन्होंने यह काम 20 पारियां कम खेलकर किया – जो उनकी निरंतरता (consistency) का सबसे बड़ा सबूत है।

चौथी पारी का रिकॉर्ड — कम चर्चित लेकिन उतना ही अहम

बहुत कम फैंस को यह याद होगा कि इसी साल की शुरुआत में रूट ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हैगली ओवल टेस्ट में एक और तेंदुलकर रिकॉर्ड तोड़ा था। नाबाद 23 रन की एक छोटी लेकिन मैच जिताने वाली पारी खेलकर रूट ने टेस्ट क्रिकेट की चौथी पारियों में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया – कुल 1,630 रन, जबकि तेंदुलकर का यह आंकड़ा 1,625 रन था। इस लिस्ट में एलिस्टेयर कुक और ग्रीम स्मिथ 1,611 रन के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर, जबकि शिवनरायण चंद्रपॉल 1,580 रन के साथ पांचवें स्थान पर मौजूद हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि चौथी पारी में सबसे ज़्यादा अर्धशतक (fifty-plus स्कोर) लगाने के मामले में भी रूट अब शिवनरायण चंद्रपॉल, ग्रीम स्मिथ और क्रिस गेल के साथ संयुक्त रूप से सबसे आगे खड़े हैं – यानी दबाव की परिस्थिति में रन बनाने की कला में रूट का कोई सानी नहीं है। चौथी पारी वह पारी होती है जहां पिच सबसे ज़्यादा खराब हो चुकी होती है, दबाव सबसे ज़्यादा होता है, और गेंदबाज़ सबसे ज़्यादा आक्रामक होते हैं – ऐसे में यह रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि मानसिक मज़बूती (mental toughness) का प्रमाण है।

पूरी तस्वीर: रूट बनाम तेंदुलकर, अब तक का हिसाब

आंकड़ासचिन तेंदुलकरजो रूट (12 सितंबर 2026 तक)
कुल टेस्ट रन15,92114,278
टेस्ट मैच200169
पारियांलगभग 329309
औसत53.7850.45
शतक5141
अर्धशतक6869 (नया रिकॉर्ड)
चौथी पारी में रन1,6251,630 (नया रिकॉर्ड)

आंकड़ों से साफ है कि रूट अभी भी कुल रन और शतकों के मामले में तेंदुलकर से पीछे हैं, लेकिन जिस रफ्तार से वे आगे बढ़ रहे हैं, वह चौंकाने वाली है। 2022 में इंग्लैंड की कप्तानी छोड़ने के बाद से रूट का बल्ला जैसे और तेज़ चला है – कप्तानी की ज़िम्मेदारी हटते ही उनका फोकस पूरी तरह बल्लेबाज़ी पर आ गया, और नतीजा सबके सामने है।

आखिर रूट इतने रिकॉर्ड क्यों तोड़ पा रहे हैं? — असली वजह

ज़्यादातर हिंदी स्पोर्ट्स वेबसाइट्स सिर्फ आंकड़े गिनाकर रुक जाती हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर 2013 के बाद के दौर में कोई बल्लेबाज़ तेंदुलकर के रिकॉर्ड्स के इतने करीब कैसे पहुंच पाया। इसकी तीन बड़ी वजहें हैं:

1. इंग्लैंड का बदला हुआ खेलने का तरीका (Bazball प्रभाव): 2022 के बाद से इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट में बेहद आक्रामक रणनीति अपना चुका है। इस “Bazball” फिलॉसफी में टीम हर पारी में तेज़ी से रन बनाने और परिणाम की तरफ बढ़ने पर ज़ोर देती है। इससे रूट को चौथी पारी में रन बनाने के कहीं ज़्यादा मौके मिले हैं, क्योंकि इंग्लैंड लक्ष्यों का पीछा करने से नहीं कतराता।

2. मैचों की संख्या और शेड्यूलिंग: इंग्लैंड आज के दौर में बाकी टीमों के मुकाबले सबसे ज़्यादा टेस्ट मैच खेलता है। रूट के डेब्यू के बाद से इंग्लैंड ने जितने टेस्ट खेले हैं, वह न्यूज़ीलैंड, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों से काफी ज़्यादा है। ज़ाहिर है, ज़्यादा मैच यानी रिकॉर्ड बनाने के ज़्यादा मौके।

3. करियर के तीसरे दशक में शानदार फॉर्म: आमतौर पर बल्लेबाज़ 30 की उम्र के बाद ढलान पर आ जाते हैं, लेकिन रूट का करियर उलटा चल रहा है। उनके दो सबसे ज़्यादा शतक वाले साल – छह-छह शतक – तीसवें साल के बाद ही आए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि रूट पारंपरिक करियर ग्राफ को धता बताते हुए एक “लेट ब्लूमर” के रूप में उभरे हैं।

क्या रूट सच में सचिन का 15,921 रन का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे?

यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर क्रिकेट फैन के मन में है। मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से रूट को तेंदुलकर से आगे निकलने के लिए अभी भी करीब 1,650 रन और चाहिए। पिछले कुछ सालों के औसत प्रदर्शन को देखें तो रूट हर साल औसतन 1,000 से ज़्यादा टेस्ट रन बना रहे हैं। अगर फिटनेस साथ देती है और इंग्लैंड बोर्ड उन्हें टीम में बनाए रखता है, तो 2028 तक यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी टूट सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने भी रूट की इस उपलब्धि की खुले दिल से तारीफ की, और इसे टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के सबसे शानदार लम्हों में गिना। वहीं एलिस्टेयर कुक का मानना है कि अगर फॉर्म और फिटनेस बरकरार रही तो रूट टेस्ट क्रिकेट में 16,000 रन का आंकड़ा पार करने वाले पहले बल्लेबाज़ भी बन सकते हैं – एक ऐसा मुकाम जिसे आज तक कोई नहीं छू पाया।

भारतीय फैंस के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत में सचिन तेंदुलकर को सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक भावना के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में जब भी कोई विदेशी खिलाड़ी उनके किसी रिकॉर्ड के करीब पहुंचता है या उसे तोड़ता है, तो भारतीय फैंस में मिलीजुली भावनाएं देखने को मिलती हैं – एक तरफ खेल की खूबसूरती को सराहने का जज़्बा, तो दूसरी तरफ अपने आदर्श के रिकॉर्ड को थामे रखने की चाहत। लेकिन सच यह है कि रिकॉर्ड बनने और टूटने के लिए ही होते हैं, और सचिन खुद कई मौकों पर कह चुके हैं कि रिकॉर्ड टूटना खेल के आगे बढ़ने की निशानी है।

यह भी याद रखना ज़रूरी है कि आज के दौर में टी20 और वनडे क्रिकेट की भरमार के बावजूद जो रूट जैसा खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देकर इतने बड़े मुकाम हासिल कर रहा है – यह खुद टेस्ट क्रिकेट के लिए एक सुखद संकेत है।

निष्कर्ष

जो रूट का यह सफर सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि निरंतरता, धैर्य और खेल के प्रति समर्पण की मिसाल है। तेंदुलकर के अर्धशतकों और चौथी पारी के रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूट टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड – सबसे ज़्यादा रन – तक भी पहुंच पाते हैं या नहीं। आने वाले दो-तीन साल क्रिकेट इतिहास के लिहाज़ से बेहद अहम होने वाले हैं, और IPLGlory पर हम इस रोमांचक सफर पर पैनी नज़र बनाए रखेंगे।

आप क्या सोचते हैं — क्या जो रूट आखिरकार सचिन तेंदुलकर के 15,921 रन के रिकॉर्ड को भी पार कर जाएंगे? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताएं।

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